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देखती हूँ एक सपना

ब्लॉग की दुनिया में यह मेरा पहला कदम है,या फिर कह सकते है कि यह मेरे लिए एक नया अनुभव है. मन में एक उहापोह सी स्थिति है कि अपना प्रथम लेख किस विषय पर लिखूं . विषय तो अनेक है पर लिखूं तो क्या लिखूं?   कि अचानक मेरे मन में एक ख्याल आया कि क्यों न मैं अपनी पहली कविता ही लिखूं ? मेरी वो कविता इस प्रकार है _                  जब भी बंद करती हूँ,अपनी आँखे                    देखती हूँ एक सपना,                   कोई देखता है, मुझे लाचार निगाहों से                    पढ़ने की कोशिश तो बहुत करती हूँ                   लेकिन पढ़ नही पाती                   ऐसा क्या है उन लाचार निगाहों में                    जो मुझे खीचती है सदा अपनी ओर, कहते है ना कि आप...