मृग तृष्णा
इंसान बहुत सारी चीजों से भागता। वो लोगों से भागता है, यादों से भागता है, जगह से भागता है, शहर से भागता है यहां तक कि अपने आपसे भी दूर भागता है। कई बार जब वो किसी जगह या शहर से दूर भागता है तो वो इसलिए कि क्योंकि वो जगह खास थी, बेहद खास पर आम ज़िन्दगी जीने के दबाव में वो दोबारा उस खास जगह नहीं जा सकता क्योंकि वो फिर उस दौर में खुद को जीने लगेगा, जब वो खास हुआ करता था, जब वो प्रेम में था। वो प्रेम जि से उसने खुद चुना था। लेकिन प्रेम अक्सर आपको सिर्फ दो पल के लिए ही खास बनाता है, ताउम्र खास बने रहने के लिए वो बहुत सारी चीज़ो का बलिदान मांगता है। और अफसोस ज़हन से कमज़ोर और ज़िंदगानी से आम वो शख्स ऐसा कर नहीं पाता। ऐसे में वो फिर भागने लगता है, शहर से, जगह से, अपने आप से। पर इस दौरान छोड़ा जा चुका या छोड़ने की कोशिश वाला सब उनके मन में कहीं चिपक सा जाता है। भागने के दौरान वो ये देख नहीं पाता। अचानक एक दिन जब वो रुकता है तो देखता जिसे पीछे छूटा सोच वो भाग रहा था, वो तो उसके साथ ही था। ऐसे में जिस दिन वो ...