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मृग तृष्णा

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इंसान बहुत सारी चीजों से भागता। वो लोगों से भागता है, यादों से भागता है, जगह से भागता है, शहर से भागता है यहां तक कि अपने आपसे भी दूर भागता है। कई बार जब वो किसी जगह या शहर से दूर भागता है तो वो इसलिए कि क्योंकि वो जगह खास थी, बेहद खास पर आम ज़िन्दगी जीने के दबाव में वो दोबारा उस खास जगह नहीं जा सकता क्योंकि वो फिर उस दौर में खुद को जीने लगेगा, जब वो खास हुआ करता था, जब वो प्रेम में था। वो प्रेम जि से उसने खुद चुना था। लेकिन प्रेम अक्सर आपको सिर्फ दो पल के लिए ही खास बनाता है, ताउम्र खास बने रहने के लिए वो बहुत सारी चीज़ो का बलिदान मांगता है। और अफसोस ज़हन से कमज़ोर और ज़िंदगानी से आम वो शख्स ऐसा कर नहीं पाता। ऐसे में वो फिर भागने लगता है, शहर से, जगह से, अपने आप से। पर इस दौरान छोड़ा जा चुका या छोड़ने की कोशिश वाला सब उनके मन में कहीं चिपक सा जाता है। भागने के दौरान वो ये देख नहीं पाता। अचानक एक दिन जब वो रुकता है तो देखता जिसे पीछे छूटा सोच वो भाग रहा था, वो तो उसके साथ ही था। ऐसे में जिस दिन वो                          ...

सिद्धार्थ बनाम बुद्ध

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सिद्धार्थ (जो अब बुद्ध बन चके थे) और यशोधरा आमने सामने बैठे हुते थे। यशोधरा की तरफ देखते हुए बुद्ध ने कहा तुम कैद हो इस नश्वर संसार में। यशोधरा बस मुस्कुरा देती हैं। उनकी मुस्कान देख बुद्ध कहते हैं, नहीं शायद तुम आज़ाद हो अपनी मुस्कान के बदौलत। कुछ सोचते हुए अचानक से बुद्ध यशोधरा से पूछते हैं, जीवन क्या है? यशोधरा हल्की मुस्कान के साथ जवाब देती हैं, एक क्षण, मात्र। यह सुन बुद्ध कुछ सोचने लगते हैं कि अचानक से यशोधरा बोलती हैं, आपको क्या लगा जिस रात्रि के सुनसान पहर में आप मुझे छोड़ अकेले चल दिये थे ज्ञान की खोज में यह सोचकर की आप इस नश्वर दुनिया के प्रपंच से आज़ाद हो जाएंगे, ठीक उसी क्षण से आप मेरे विचारों और अपनी आत्मग्लानि में कैद हो गए थे। और उसी क्षण मैं स्त्री रूपी सभी बन्धन से आज़ाद हो गयी थी। पर पता है आपकी यह कैद और मेरी ये आज़ादी सिर्फ हम दोनों के स्व को ही पता है और यही है स्त्री और पुरुष के मध्य का रहस्यवाद। #एक_लड़की_के_नोट्स Reply Forward