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मई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
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फोटो-साभार-इंटरनेट कृष्ण अपने बाएं  तलवे से बहती रक्त की उस पतली धारा को अपलक देख रहे थे। अचानक कृष्ण अपने अतीत की स्मृतियों में खो गए। एक दिन जब कृष्ण द्वारका के अपने महल में लेटे हुए थे,और रुक्मिणी उनके शरीर पर चंदन का लेप लगा रहीं थी तो कृष्ण के तलवे पर चंदन का लेप लगाते, लगाते रुक्मणि कहीं खो सी गईं ।  कृष्ण ने रुक्मिणी को खोए हुए देखा तो बोले क्या हुआ देवी? कोई बात ?आप यूँ अचानक कहाँ खो गईं? रुक्मिणी कृष्ण की आवाज़ सुन चौंक उठीं, कृष्ण के प्रश्न का उत्तर देते हुए बोलीं, प्रभु मन में एक प्रश्न है कि हाथों की रेखाओं की तरह पैरों के तलवों पर भी तो रेखाएं होती हैं, क्या वो भी हाथों की रेखाओं की तरह ही हमारे भविष्य का निर्धारण करती हैं? कृष्ण रुक्मिणी की बात सुन मुस्कुराए और बोले, हां देवी कर्म प्रधान इस जीवन में हाथों और पैरों दोनों की रेखाएं हमारे भविष्य का निर्धारण करती हैं। जिस प्रकार हमारे हाथों द्वारा किये गए कार्य ही हमारे भविष्य के अच्छे या बुरे होने का संकेत देते हैं  ठीक उसी प्रकार हम किस परिस्थिति के वशीभूत हो जीवन में कौन सा मार्ग अपनाते हैं यह हमारे पैर...
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फोटो- साभार- इंटरनेट यशोधरा, बुद्ध से, मृत्य क्या है?  बुद्ध- जीवन की परिणीति… तुम्हारी दृष्टि से मृत्यु क्या है यशोधरा? यशोधरा- जीवन की शुरुआत बुद्ध- जीवन की शुरुआत, वो कैसे? यशोधरा- देखा जाए तो हमारा वास्तविक जीवन मृत्यु के बाद शुरू होता है। हमने जीवन भर क्या किया उस सबका परिणाम मृत्यु के बाद पता चलता है। बुद्ध- वो कैसे यशोधरा- किसी की स्मृतियों में हम किस तरह जीवित हैं, यही तो हमारे सारे कर्मों का सारांश है। हमारे जीवन में भिन्न भिन्न लोग आते हैं, सबके साथ हमारा व्यवहार भी भिन्न भिन्न होता है। ऐसे में मृत्यु के बाद वही लोग हमें किस तरह याद करते हैं वही जीवन हो जाता है हमारा।  बुद्ध- तो लोग मुझे किस तरह याद रखेंगे? यशोधरा- आप महान ज्ञानी है आपको लोग सदा आदर के साथ ही स्मरण करेंगे, लेकिन आपके साथ ही अंगुलिमाल को भी लोग उसके कृत्य के अनुसार याद रखेंगे। आप दोनों ने अलग अलग कर्म किये, उसी की परिणीति के चलते लोग आपको महान देवता के रूप में याद रखेंगे और उसे डाकू के रूप में। बुद्ध- पर मैंने भी तुम्हारे साथ अच्छा कृत्य नहीं किया यशोधरा- (कुछ पल के मौन के बा...