फोटो- साभार- इंटरनेट
यशोधरा, बुद्ध से, मृत्य क्या है? 
बुद्ध- जीवन की परिणीति… तुम्हारी दृष्टि से मृत्यु क्या है यशोधरा?
यशोधरा- जीवन की शुरुआत
बुद्ध- जीवन की शुरुआत, वो कैसे?
यशोधरा- देखा जाए तो हमारा वास्तविक जीवन मृत्यु के बाद शुरू होता है। हमने जीवन भर क्या किया उस सबका परिणाम मृत्यु के बाद पता चलता है।
बुद्ध- वो कैसे
यशोधरा- किसी की स्मृतियों में हम किस तरह जीवित हैं, यही तो हमारे सारे कर्मों का सारांश है। हमारे जीवन में भिन्न भिन्न लोग आते हैं, सबके साथ हमारा व्यवहार भी भिन्न भिन्न होता है। ऐसे में मृत्यु के बाद वही लोग हमें किस तरह याद करते हैं वही जीवन हो जाता है हमारा। 
बुद्ध- तो लोग मुझे किस तरह याद रखेंगे?
यशोधरा- आप महान ज्ञानी है आपको लोग सदा आदर के साथ ही स्मरण करेंगे, लेकिन आपके साथ ही अंगुलिमाल को भी लोग उसके कृत्य के अनुसार याद रखेंगे। आप दोनों ने अलग अलग कर्म किये, उसी की परिणीति के चलते लोग आपको महान देवता के रूप में याद रखेंगे और उसे डाकू के रूप में।
बुद्ध- पर मैंने भी तुम्हारे साथ अच्छा कृत्य नहीं किया
यशोधरा- (कुछ पल के मौन के बाद) आपका ये अपराधबोध शताब्दियों बाद वही इंसान समझेगा जिसने आपकी तरह ही यह कृत्य किया हो। और मेरी पीड़ा भी वही समझेगा जिसने, उस पीड़ा को भोगा होगा।
बुद्ध- यशोधरा तुम्हारे अंदर इतनी गूढ़ता कहाँ से आई? मैंने तो अपने अंदर के ज्ञान को पाने के लिए वर्षों तपस्या की। 
यशोधरा- अकेलापन आपको अपने आप से साक्षात्कार कराता है। आप भी तो तपस्या के दौरान अकेलापन जी रहे थे। आपमें और मुझमें बस एक अंतर था, आप वृक्ष के नीचे एकांत वास कर रहे थे मैं, इन महलों की चार दीवारी के अंदर एकांतवास कर रही थी।


दिव्या द्विवेदी

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