उसका यूं जाना...
यूं तो आना जाना जिंदगी की रेलमपेल का एक अभिन्न हिस्सा होता है, लेकिन उसका यूं
जाना उसे इस बार बहुत खल गया। वो गया लेकिन इस तरह की उसे खाली कर गया। अपनत्व का
वो अहसास जो उसने ही उसके दिल में भरा था आज वो खुद ही उसे खाली करके गया था। उनका
आखिर बार मिलना एक फार्मलिटी बन कर ही रह गया था। उसका वो दो शब्द की तुम रोना मत
उसकी भावनाओं को झकझोर नहीं पाया था कि वो वाकई रो पाए। कुछ टूट तो रहा था उसके
अंदर पर शायद इतनी जोर से नहीं टूटा था कि उसकी चटकन उसके अंदर दर्द का सैलाब ले
आए। इमारत अगर एक साथ गिरे तो शायद बहुत दुख होता है लेकिन उसे धीरे- धीरे कर के
तोड़ा जाए तो दर्द कम होता है ऐसा ही कुछ उसके साथ भी हो रहा था। वो केवल जा भर
नहीं रहा था बल्कि उसके साथ बेउत्तर वो सवाल भी जा रहे थे जो वो उससे पूछना चाहती
थी, जानना चाहती थी। हर उस सवाल का जवाब चाहती थी जो उसके दिल- दिमाग में कई दिनों
से चल रहे थे... पर जिस तरह वो चला गया ठीक उसी तरह वो अधूर से सवाल भी चले गए। वो सवाल पूरे तभी होते न जब उनके
जवाब उसे मिल जाते। वैसे तो दर्शन की बात करने में वो बहुत ही माहिर है ‘जिंदगी में तमाम लोग आपसे
मिलते और बिछुड़ते रहते हैं’ यही उसका फलसफा है लेकिन कहते हैं न कि दर्शन और जीवन दोनों
ही दो अलग- अलग बातें हैं। खैर वो जा रहा था नहीं, वो जा चूका था। वो शाम बहुत ही
ज्यादा उदास थी। ऐसा क्यों होता है कि जब हमारा मन उदास या परेशान होता है तो मौसम
का मिजाज भी कुछ ऐसा ही मालूम पड़ता है। वो रो रही थी नेचर भी उसका साथ दे रहा था
क्योंकि उस दिन बारिश भी हो रही थी। यूं तो किसी का जाना किसी को भी अच्छा नहीं
लगता है लेकिन उसका जाना जहां उसे एक उदासी दे रहा था वहीं दूसरी तरफ उसे सुकून भी
दे रहा था क्योंकि एक बेनाम और बेमकसद के रिश्ते का एक तरह से खात्मा ही हो रहा
था। वैसे भी लोग चाहें जो कर लें लॉंग डिस्टेंस रिलेशनशीप ज्यादा देर तक चलते
नहीं। उसे कभी- कभी ऐसा लगता था कि उन दोनों के शरीर तो पास में थे लेकिन शायद
दोनों का मन एक नहीं था। उसे अक्सर लगता था कि वो उसे सही तरीके से समझ भी पाता है
या नहीं... खैर वो उसकी बहुत सारी बातें उसकी दिमाग में यूं ही घूमती रहती हैं। लेकिन चाहे जितनी भी बातें
हों उसका जाना उसे ऐसे ही लग रहा था कि जैसे किसी मासूम से बच्चे के होंठों से
किसी ने हंसी छीन ली, सारे मौसमों से बरसात के मौसम को हटा देना, फोटो के अलबम में
से किसी ने बचपन की यादों को मिटा दिया हो, पहली बारिश के बाद की गीली मिट्टी से
किसी ने सौंधापन छीन लिया हो। इन सारी मतलब, बेमतलब बातों की सच्चाई यही है कि वो
चला गया है। उसे पता है अभी उनके बीच सिर्फ शहर की, कुछ मीलों की दूरियां है लेकिन
यही मीलों की दूरियां कब दिलों की दूरियां बन जाएंगी पता नहीं चलेगा। उसका यूं
जाना... वाकई बहुत कुछ कह गया, कुछ कहा, कुछ अनकहा....
# एक लड़की के नोट्स
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें