कुछ नाटकों का पर्दा कभी नहीं गिरता
कुछ नाटकों का पर्दा कभी नहीं गिरता, दर्शकों के मन में उनका मंचन सदा होता रहता है….
थियेटर का चस्का मुझे Ramkumar Singh सर ने लगाया था, वो भी मजेदार किस्सा था। उस दिन मैं ऑफिस का काम जल्दी खत्म कर 4:30 बजे निकलने की सोच रही थी, राम सर मेरी बगल वाली सीट पर आकर बैठ मुझसे बोले इतनी जल्दी किस बात की है? मैंने स्क्रीन पर देखते हुए ही बोला कि अरे, आज गणगौर माता की सवारी निकलेगी वही देखने जाना है, जब जयपुर में हैं तो ये देखना तो बनता है। राम सर ने बोला कि सुनो इधर देखो, हम बोले क्या देखें?आर्टिकल जल्द से जल्द खत्म कर जाना है भाई। राम सर बोले तुम देखो तो, मैंने उनकी तरफ चेहरा कर बोला, बोलिये, तो उन्होंने बहुत ही दार्शनिक अंदाज़ में बोला की ये गणगौर माता की सवारी तो हर साल निकलेगी, पर अच्छा प्ले हर बार देखने को नहीं मिलेगा। JKK (जवाहर कला केंद्र) में एक बेहतरीन नाटक होगा 5 बजे से तुम वहां जाओ। मैंने पूरी मासूमियत के साथ कहा कि हमने कभी प्ले नहीं देखा, तो राम सर ने मुस्कुराते हुए कहा अब देखो, थियेटर अच्छी चीज होती है देखना चाहिए और जब फ्री में हो तो बिल्कुल देखना चहिये, तुम मेरे कहने पर देखो अच्छा लगेगा, फिर कल हम इस पर बात करेंगे।
मैंने ok कह अपने प्लान में बदलाव कर प्ले देखने जाने का निर्णय किया। वो प्ले था कुसुमल सपनों जो कि शेक्सपियर के लिखे नाटक Midsummer Night’s Dreams का राजस्थानी वर्ज़न था। प्ले जयपुर की स्थानीय भाषा ढूंढाणी में था। हालांकि भाषा की समझ मुझे नहीं थी लेकिन कलाकारों की उम्मदा अभिनय ने मजा ला दिया था।
उस प्ले को देखने के बाद मेरे अंदर 2 महत्वपूर्ण बदलाव आए, 1 की मुझे नाटकों में दिलचस्पी हुई, दूसरे ये की कला भाषाई सीमा से कई ऊपर होती है।
खैर जबतक जयपुर के दिन रहे, थिएटर के दिन रहे मेरे। जयपुर में एक थियेटर उत्सव होता है जिसे जयरंगम नाम दिया गया। 2014 के दिसम्बर के पहले हफ्ते में जयरंगम में मैंने एक नाटक देखा जिसका नाम था The Colour Blind नाटक गुरु रविन्द्र नाथ टैगौर के प्रेम पक्ष को लेकर था, शायद उनकी प्रियसी को लेकर। नाटक की समाप्ति के बाद कास्ट के साथ निर्देशक का नाम लिया जाता है साथ ही खेद भी प्रकट किया जाता है कि व्यक्तिगत कारणों की वजह से निर्देशक महोदय आ नहीं पाए। निर्देशक का नाम था “मानव कौल”। नाटक को इतनी संजीदगी के साथ बनाने वाले के बारे में जानने की उत्सुकता हुई, घर आकर गूगल किया तो पता चला कि यह तो वही शख्स है जिसे बचपन में जजंतरम -ममन्तरम फ़िल्म में देखा था। तब इंस्टाग्राम का नया नया दौर आया था मानव को वहां फॉलो किया गया। इंस्टा पर जीवन को लेकर उनके लिखे पोस्ट को पढ़ उनकी रचनाशीलता के समंदर में हम खोते से चले गए।
कहते हैं न कि समय बदलता है तो हालात भी बदलते हैं, जयपुर छूटा तो साथ में बहुत कुछ पीछे छूट गया, थियेटर भी…
10 साल… कई बार खुद की पसंदीदा चीज़ को दोबारा करने में कितना वक्त लग जाता है ना… उस वक़्त में बहुत कुछ घटित होता रहता है, बस वो पसंदीदा चीज़ नहीं होती। एक खुशी को जीने में कितना वक्त लगता है? एक पल न…पर वो पल अक्सर साल दर साल की उलझनों में कहीं खो सा जाता है। उस पल को ढ़ंढने में कितना वक्त लग जाता है… फिर एक दिन हम हार जाते हैं कि शायद ही वो फिर मिले…
पर पुरानी जैकेट की अंदर की पॉकेट में कभी बचाकर रखा 10 रुपये जैसे मिलता है न सालों बाद, ठीक वैसे ही अचानक वो पल सामने आता है, और बताता है कि जीवन में अभी स्पंदन है… ठीक वही स्पंदन महसूस हुआ अप्रैल की उस शाम में जब ऑफिस की दोस्त की जिद्द पर की अरे दिव्या मैडम चलिए न मानव का प्ले है…कहानी जहां ठहरी थी, सालों बाद फिर वहीं से शुरू हुई, मानव कौल के निर्देशन में बना तुम्हारे बारे में एक उम्दा प्ले है।
किसी भी सिलसिले को शुरू होने को बस एक कोशिश की दरकार होती है और मेरे थियेटर के इस सिलसिले को दोबारा शुरू करने में प्रेरणा की वो ज़िद्द काम आयी। उसके बाद National School of Drama और श्री राम सेंटर के प्रांगण में कई उम्दा नाटक देखा, जिसमें बायन और बंद गली का आखिरी मकान बेहतरीन लगे। 10 बाद शुरू हुए मेरे थियेटर के सिलसिले में एक बड़ा अंतर यह था कि अब मैं थियेटर का मजा अकेले भी लेने लगी हूँ। 2024 को खत्म होने में बस चंद लम्हें पर इस साल का आखिरी नाटक जो देखा मैंने वो भी मानव कौल द्वारा निर्देशित “शक्कर के पांच दाने” रहा। शक्कर के पांच दाने में कुमुद मिश्रा ने अभिनय किया है। मुझे याद है सालों पहले Shalini Agarwal जी ने मुझे फोन कर कहा था कि दिव्या मुझे पता है कि तुम्हें थियेटर बहुत पसन्द है, अगर दिल्ली में कभी ये नाटक हो तो ज़रूर देखना। उनकी कही इस बात को सालों बाद 29 दिसम्बर को मैं पूरा कर पाई।
साल खत्म हो रहा है पर जो कहानी 2014 में रुकी थी वो 2024 में फिर शुरू हुई...कहते हैं न कि कुछ कहानियों का कभी अंत नहीं होता....वो निरंतर नए किस्सों को अपने में जोड़ उपन्यास का रंग ले लेती हैं♥️
#एक_लड़की_के_नोट्स
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