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पाती...

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सुनो.... हां बोलो, तुम हर बार हर किसी को तोहफे के साथ एक चिट्ठी क्यों देती हो ? हम्म.... बड़ा कठिन सवाल है, मजाक मत करो न, बोलो न, क्यों देती हो सबको चिट्ठी मुझे अच्छा लगता है चिट्ठी देना, क्योंकि मैं उसमें उस शख्स से वो सारी बातें लिख के कह सकती हूं जो शायद सामने बैठने पर न कह सकूं। तुम्हें याद है सुजाता... हां याद है उसे भी तो तुमने उसके वेडिंग गिफ्ट के साथ एक चिट्ठी लिख के दी थी, हां और उसने मुझसे ही वो चिट्ठी पढ़वाई थी। मैंने जब वो चिट्ठी खत्म की तो सुजाता के साथ पीजी की हर लड़की की आंखें नम थी। हम्म किस तरह उसने तुम्हें रोते हुए गले लगाया था.... हां, सब याद है। पर एक बात तुम्हें नहीं पता। क्या ?  शादी के बाद उसने अपने पति को भी मेरा वो लेटर पढ़वाया था और उसके पति ने पता है क्या बोला था, क्या, कि सुजाता तुम्हारे सारे वेडिंग गिफ्ट में से ये लेटर सबसे अच्छा और दिल से दिया गया तोहफा है। पता है दिल से लिखी एक चिट्ठी बहुत सारे तोहफों से भी अनमोल होती है। हम्म, और किसको-किसको ये चिट्ठी वाला तोहफा दिया है तुमने ? बहुतों को तो नहीं, पर कुछ खास को... पापा, भईया, द...