तुम्हारी तरह बनना गुलज़ार
तुम्हारी तरह बनना गुलज़ार मैं तुम्हारी तरह बनना चाहती हूं गुलज़ार जिस तरह तुमने उन अहसासों को शब्द दिए जिसे हम बस अहसास समझ भूल जाते हैं, तुम्हारे शफ्फाक सफेद कुर्ते की तरह अपने दिल को पाक रखना चाहती हूं तुम्हारे नजर के चश्मे से दुनिया देखना चाहती हूं गुलज़ार हां मैं तुम्हारी तरह जीना चाहती हूं दिल में एक बचपन लिए जो उम्र के फासले को कहीं दूर छोड़ आए तुम्हारी तरह प्यार करना चाहती हूं गुलज़ार वो भी प्यार के उस खत की तरह जिसकी खुशबू कभी फीकी न हो, हां मैं तुम्हारी तरह बनना चाहती हूं, पर ये तुम्हें भी मालूम है और मुझे भी इसकी इत्तेला है कि ये नामुमकिन... पर नहीं गुलज़ार वाकई में मैं तुम्हारी तरह नहीं बन सकती हूं क्योंकि वो पाकिजगी, वो बचपन, वो शब्दों के जादू कुछ भी तो नहीं है मेरे पास जिसने तुम्हें गुलज़ार किया और जिस कारण तुम गुलज़ार बनें। दिव्या