सिद्धार्थ बनाम बुद्ध
सिद्धार्थ (जो अब बुद्ध बन चके थे) और यशोधरा आमने सामने बैठे हुते थे। यशोधरा की तरफ देखते हुए बुद्ध ने कहा तुम कैद हो इस नश्वर संसार में। यशोधरा बस मुस्कुरा देती हैं। उनकी मुस्कान देख बुद्ध कहते हैं, नहीं शायद तुम आज़ाद हो अपनी मुस्कान के बदौलत। कुछ सोचते हुए अचानक से बुद्ध यशोधरा से पूछते हैं, जीवन क्या है? यशोधरा हल्की मुस्कान के साथ जवाब देती हैं, एक क्षण, मात्र। यह सुन बुद्ध कुछ सोचने लगते हैं कि अचानक से यशोधरा बोलती हैं, आपको क्या लगा जिस रात्रि के सुनसान पहर में आप मुझे छोड़ अकेले चल दिये थे ज्ञान की खोज में यह सोचकर की आप इस नश्वर दुनिया के प्रपंच से आज़ाद हो जाएंगे, ठीक उसी क्षण से आप मेरे विचारों और अपनी आत्मग्लानि में कैद हो गए थे। और उसी क्षण मैं स्त्री रूपी सभी बन्धन से आज़ाद हो गयी थी। पर पता है आपकी यह कैद और मेरी ये आज़ादी सिर्फ हम दोनों के स्व को ही पता है और यही है स्त्री और पुरुष के मध्य का रहस्यवाद। #एक_लड़की_के_नोट्स Reply Forward