फोटो-साभार-इंटरनेट कृष्ण अपने बाएं तलवे से बहती रक्त की उस पतली धारा को अपलक देख रहे थे। अचानक कृष्ण अपने अतीत की स्मृतियों में खो गए। एक दिन जब कृष्ण द्वारका के अपने महल में लेटे हुए थे,और रुक्मिणी उनके शरीर पर चंदन का लेप लगा रहीं थी तो कृष्ण के तलवे पर चंदन का लेप लगाते, लगाते रुक्मणि कहीं खो सी गईं । कृष्ण ने रुक्मिणी को खोए हुए देखा तो बोले क्या हुआ देवी? कोई बात ?आप यूँ अचानक कहाँ खो गईं? रुक्मिणी कृष्ण की आवाज़ सुन चौंक उठीं, कृष्ण के प्रश्न का उत्तर देते हुए बोलीं, प्रभु मन में एक प्रश्न है कि हाथों की रेखाओं की तरह पैरों के तलवों पर भी तो रेखाएं होती हैं, क्या वो भी हाथों की रेखाओं की तरह ही हमारे भविष्य का निर्धारण करती हैं? कृष्ण रुक्मिणी की बात सुन मुस्कुराए और बोले, हां देवी कर्म प्रधान इस जीवन में हाथों और पैरों दोनों की रेखाएं हमारे भविष्य का निर्धारण करती हैं। जिस प्रकार हमारे हाथों द्वारा किये गए कार्य ही हमारे भविष्य के अच्छे या बुरे होने का संकेत देते हैं ठीक उसी प्रकार हम किस परिस्थिति के वशीभूत हो जीवन में कौन सा मार्ग अपनाते हैं यह हमारे पैर...