देखती हूँ एक सपना
ब्लॉग की दुनिया में यह मेरा पहला कदम है,या फिर कह सकते है कि यह मेरे लिए एक नया अनुभव है. मन में एक उहापोह सी स्थिति है कि अपना प्रथम लेख किस विषय पर लिखूं . विषय तो अनेक है पर लिखूं तो क्या लिखूं? कि अचानक मेरे मन में एक ख्याल आया कि क्यों न मैं अपनी पहली कविता ही लिखूं ? मेरी वो कविता इस प्रकार है _
जब भी बंद करती हूँ,अपनी आँखे
देखती हूँ एक सपना,
कोई देखता है, मुझे लाचार निगाहों से
पढ़ने की कोशिश तो बहुत करती हूँ
लेकिन पढ़ नही पाती
ऐसा क्या है उन लाचार निगाहों में
जो मुझे खीचती है सदा अपनी ओर,
कहते है ना कि आप अपनी जिन्दगी में प्रथम बार जब कोई कार्य करते है तो वह सदा आपके लिए खास होती है .इसी तरह स्वतः रचित यह कविता मेरे लिए सदा खास रहेगी.
इस कविता के पीछे भी एक रोचक कथा है. कथा इसप्रकार है कि मैंने जब अपनी यह प्रथम कविता लिखी उस वक्त मैं सातवीं कक्षा की छात्रा थी.और मेरी अर्ध वार्षिक परीक्षा चल रहीं थी. अगले दिन मेरा रेखा गणित का पेपर था.दोपहर का समय था मैं रेखा गणित के पेपर के लिए अपनी किताब पढ़ रही थी कि अचानक मन में एक ख्याल आया.सोचा कि क्यों न इसे लिपिबद्ध कर लूँ.लिखने के बाद बहुत अच्छा महसूस हो रहा था.मारे ख़ुशी के मैंने अपने द्वारा रचित इस कविता को दिखाने के लिए अपने बड़े भाई के पास गयी.उन्होंने कविता बहुत ध्यान से पढ़ी और मुझे प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मैंने अपनी उम्र के हिसाब से बहुत अच्छी व गम्भीर कविता लिखी है. उस दिन मुझे इतनी ख़ुशी मिली कि मेरे लिए शायद उसे लिपिबद्ध करना अब थोड़ा मुश्किल हो.इस तरह अनजाने में ही सही मेरी पहली कविता का सृजन हुआ .
bhut badhiya divya ji... hume to pata hi nahi tha .. aap likhti bhi hai... likhte rahiye.. isme alag sukoon hai.... bhut umda shuruwat..:-)
जवाब देंहटाएंbadhaiyan....
बहुत अच्छी शुरुआत है,अच्छी सोच है. आप जरुरतमंदों,पीडितों, गरीबों के बारे में सोचती है जानकर बहुत अच्छा लगा. आप साहित्य पढ़ती हैं ये तो पता था मगर लिखती भी हैं नहीं मालूम था. लिखने की कोशिश भी उम्दा है, खासकर जो जनपक्षधरता दिखाई दे रही है. बस यहीं गुजारिश है सपने देखना मत छोड़ियेगा. पाश ने बहुत ख़ूब लिखा है- ‘ना होना तड़प का, सबकुछ सहन कर जाना
जवाब देंहटाएंघर से निकलना काम पर, और काम से लौट कर घर आना
सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना’
शाबाश
जवाब देंहटाएंवेणु गोपाल की कुछ पंक्तियाँ हैं
न हो कुछ भी
सिर्फ एक सपना हो
तो भी हो सकती है शुरुआत
और यह शुरुआत ही तो है
यहाँ एक सपना है
सपना सार्थक होना ही चाहिए .. है न ..