हर लम्हें में कैद होती है एक कहानी। कहानियों से भरपूर इस जिंदगी के कुछ किस्से, कुछ लम्हें साझा करना...ताकि दिल के अंदर वो कहानियां कैद होकर न रह सकें जिन्हें दूसरों के सामने आना चाहिए था।
कुछ नाटकों का पर्दा कभी नहीं गिरता, दर्शकों के मन में उनका मंचन सदा होता रहता है…. थियेटर का चस्का मुझे Ramkumar Singh सर ने लगाया था, वो भी मजेदार किस्सा था। उस दिन मैं ऑफिस का काम जल्दी खत्म कर 4:30 बजे निकलने की सोच रही थी, राम सर मेरी बगल वाली सीट पर आकर बैठ मुझसे बोले इतनी जल्दी किस बात की है? मैंने स्क्रीन पर देखते हुए ही बोला कि अरे, आज गणगौर माता की सवारी निकलेगी वही देखने जाना है, जब जयपुर में हैं तो ये देखना तो बनता है। राम सर ने बोला कि सुनो इधर देखो, हम बोले क्या देखें?आर्टिकल जल्द से जल्द खत्म कर जाना है भाई। राम सर बोले तुम देखो तो, मैंने उनकी तरफ चेहरा कर बोला, बोलिये, तो उन्होंने बहुत ही दार्शनिक अंदाज़ में बोला की ये गणगौर माता की सवारी तो हर साल निकलेगी, पर अच्छा प्ले हर बार देखने को नहीं मिलेगा। JKK (जवाहर कला केंद्र) में एक बेहतरीन नाटक होगा 5 बजे से तुम वहां जाओ। मैंने पूरी मासूमियत के साथ कहा कि हमने कभी प्ले नहीं देखा, तो राम सर ने मुस्कुराते हुए कहा अब देखो, थियेटर अच्छी चीज होती है देखना चाहिए और जब फ्री में ...
यूं तो आना जाना जिंदगी की रेलमपेल का एक अभिन्न हिस्सा होता है, लेकिन उसका यूं जाना उसे इस बार बहुत खल गया। वो गया लेकिन इस तरह की उसे खाली कर गया। अपनत्व का वो अहसास जो उसने ही उसके दिल में भरा था आज वो खुद ही उसे खाली करके गया था। उनका आखिर बार मिलना एक फार्मलिटी बन कर ही रह गया था। उसका वो दो शब्द की तुम रोना मत उसकी भावनाओं को झकझोर नहीं पाया था कि वो वाकई रो पाए। कुछ टूट तो रहा था उसके अंदर पर शायद इतनी जोर से नहीं टूटा था कि उसकी चटकन उसके अंदर दर्द का सैलाब ले आए। इमारत अगर एक साथ गिरे तो शायद बहुत दुख होता है लेकिन उसे धीरे- धीरे कर के तोड़ा जाए तो दर्द कम होता है ऐसा ही कुछ उसके साथ भी हो रहा था। वो केवल जा भर नहीं रहा था बल्कि उसके साथ बेउत्तर वो सवाल भी जा रहे थे जो वो उससे पूछना चाहती थी, जानना चाहती थी। हर उस सवाल का जवाब चाहती थी जो उसके दिल- दिमाग में कई दिनों से चल रहे थे... पर जिस तरह वो चला गया ठीक उसी तरह वो अधूर से सवाल भी चले गए। वो सवाल पूरे तभी होते न जब उनके जवाब उसे मिल जाते। वैसे तो दर्शन की बात करने में वो बहुत ही माहिर है ‘ जिंदगी में तमाम लोग आपसे मिल...
26 साल की उम्र में उसने पहली बार चिनाब को देखा था, चिनाब का बहाव उसे आकर्षित कर रहा था। ड्राइवर ने उसे चिनाब को यूं देखते हुए देखा तो कहा मैडम पहाड़ी नदियां ऐसी ही होती हैं, तेज़ बहाव वाली और खतरनाक। ड्राइवर ने इशारा करते हुए कहा, आप वो साइन बोर्ड देख रही हैं, उसने चिनाब से नज़र हटा उस ओर देखा जिधर ड्राइवर इशारा कर रहा था। साइन बोर्ड पर लिखा था, आगे चिनाब नदी है, कृपया गाड़ी धीमी गति से चलाएं। ड्राइवर उसे पहाड़ी नदियों की उच्श्रृंखलता की बात बता रहा था, पर वो चिनाब के उस तेज़ बहाव में खोई थी। उसे चिनाब से एक अपना पन सा लगा। उसके अंदर भी तो ऐसा एक तेज़ बहाव अनवरत चलता रहता है, पर वो किसी से नहीं कहती है, चिनाब के बहाव जितना ही, उतना ही खतरनाक, उतना ही सब कुछ तबाह कर देने की शक्ति वाला बहाव। पर ये बहाव किसी को नहीं दिखता। कभी किसी ने उसे पहाड़ी नदी जैसा कहा था, पर तब उसने उस बात पर ध्यान नहीं दिया था, पर आज चिनाब और अपने अंदर की समानता को वो महसूस कर रही थी। कहते हैं पानी, नदी और समंदर का सपना देखना बुरा होता है। पर कुछ सालों बाद उसने चिनाब को सपने में देखा। पर सपने में चिनाब शांत थी, एकदम...
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