फैंटेसी और ख्वाहिश

सुनों, क्या... अरेंज मैरिज को लेकर तुम्हारी सबसे बड़ी फैंटेसी या कहें विश क्या है
अरेंज मैरिज....सच कहूं तो मैं ये चाहती हूं कि शादी के बाद किसी एक शाम हम दोनों अपने दो कप चाय के साथ अपनी सारी पुरानी बातें याद कर उन्हें कहें, उस प्यार के बारे में कहें जिसे पीछे छोड़ हम शादी के बंधन में बंधें। वो कसक, वो सारी बातें, सारे दुख, खुशी, गिले-शिकवे, उस रिश्ते से जुड़ी हमारी ख्वाहिशें और अंत सब पर हम दोनों बात करें। इस दौरान हम दोनों का अगर मन हो तो दोनों किसी फार्मेलिटी के खूब रो लें, ये सोचे बिना की हम किस लिए रो रहे हैं, किसके लिए रो रहे हैं और किसके सामने रो रहे हैं... बस रो लें और जब रात का गाढ़ापन बढ़ जाए तो चाय का कप ले कर जब वो उठे न तो एक हाथ मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहे, चलो यार, वो दोनों जहां रहें खुश रहें, वो दोनों भी तो हमारे बारे में यहीं सोच रहे होंगे कि हम खुश होंगे तो चलो उठो इस रात से एक नई शुरुआत करें ताकि अगले दिन का सूरज हमारे रिश्ते को अनजान लोगों की तरह नहीं देखे बल्कि उसे लगे कि इस रिश्ते में चांद का भी कुछ हिस्सा घुल चुका है बस मुझे इसमें थोड़ा अपना हिस्सा मिलना है....

यार ये तो टू फैंटेसी, ऐसा कभी होगा क्या... हम्म फैंटेसी तो है पर सच्चाई भी यही है कि फैंटेसी का खोल ओढ़कर हमारी ख्वाहिश इसके पीछे रहती है (क्योंकि फैंटेसी दिमाग से सोची जाती है पर ख्वाहिश का घर दिल होता है) और इससे बड़ी सच्चाई ये है कि हम लड़कियां अपनी जिंदगी का अधिकतर हिस्सा फैंटेसी को सोचकर और दिल में ख्वाहिश लिए ही बिताती हैं....

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कुछ नाटकों का पर्दा कभी नहीं गिरता

उसका यूं जाना...

चिनाब सी लड़की...