बंद दरवाजों से खुला लगाव

बंद दरवाजों के अंदर पता नहीं क्या अजीब सा आकर्षण होता है, जिसकी तरफ मैं बहुत आकर्षित होती हूं। एक तिल्सिम के तरह लगते हैं वो। और बंद दरवाजों के इसी आकर्षण के चलते पता नहीं कितने पेज इंस्टाग्राम पर मैंने फॉलो किए हैं। जब उन बंद दरवाजों की फोटोज को देखती हूं तो लगता है जैसे कई राज बंद हैं इन कपाटों के भीतर अगर ये कपाट अचानक से खुल गए तो पता नहीं क्या बाहर आ जाए। ये बंद दरवाजें कई बार खुद के जीवन की तरह ही लगते हैं। हमारे अंदर भी बहुत सारे दरवाजें हैं, जिन्हें हम बंद किए रहते हैं। किसी एक स्याह लम्हें या कहें चोर लम्हें में हल्का सा खोल कर दरवाजे के अंदर की तरफ छांक भर लेते हैं, ये तसल्ली करने के लिए हमारे राज अभी भी इस दरवाजें के अंदर कैद है ना। कितनी कसक होती है ना इन बंद दरवाजों में। कई बार एक मूक वेदना होती है कि खोल दो हमें, अब और कैद कर नहीं रख सकते हैं उन रहस्यों को, उन बातों को जिन्हें कोई बंद करके चला गया है हमारे अंदर। बंद दरवाजों का ये रहस्य और भी गहरा हो जाता है जब खिलड़िकयों का भी कोई पल्ला खुला ना हों वो बंद हों जैसे वो राजदार बनना चाहती हों दरवाजों की। एक भरोसेमन दोस्त की तरह कि चलो तुम्हारे राज को हम भी अपने अंदर ज़ब्त कर लेते हैं तुम बेफिक्र रहो। इन सब बातों में सबसे कमाल की बात ये है कि आप दुनिया के किसी भी देश में, किसी भी कोने में चले जाइए, दरवाजों के ये बंद रहस्य आपको हर जगह मिल जाएंगे। एक बार गोकुल गई थी, वहां कि गलियों में भी अनेक बंद दरवाजे देखे थे मैंने, जो बंद थे अपने रहस्यों के साथ... उन्हें देखते वक्त लगा कि जैसे उन गलियों और उन दरवाजों में वक्त को भी अपने अंदर कैद सा कर लिया हो। वैसे ये बंद दरवाजे कई बार डर भी पैदा कर देते हैं कि अचनाक से अगर हम इन्हें खोल देंगे तो पता नहीं कौन सी बात इनके ओट में छुपी हुई हो और अचानक से हमारे सामने वो आ जाए... क्या उस बात, उस रहस्य को हम संभाल पाएंगे। और मन के एक कोने में जवाब भी मिल जाता है कि... शायद नहीं। इसलिए अक्सर हम पूरी जिंदगी बहुत से बंद दरवाजों को खोलते नहीं है इसी डर के कारण। हां पर खिड़कियों को खोलने की कोशिश जरूर करते हैं। पर देखिए न खिलड़कियों के पल्ले खोल भी लें तो भी दरवाजे के ओट में छुपी बातें क्या हम देख पाएंगे... बंद दरवाजों से अपनी ये मोहब्बत मुझे पता नहीं क्यों अजीब लगती है, शायद पागलपन जैसी कोई हरकत, पर बाद में ये भी लगता है कि हर किसी के अंदर पागलपन वाली कोई न कोई हरकत तो होती ही है और दुनिया में कोई उसके पागलपन को न देख पाए इसलिए हर कोई किसी न किसी दरवाजे के अंदर अपने पागलपन को कैद कर लेता है। पर मुझे ये स्वीकार करने में कोई गुरेज नहीं कि बंद दरवाजों से मैं वाकई बहुत मुहब्बत करती हूं (खुले दरवाजों से भी, पर उसमें वो आकर्षण नहीं रहता है ना जो बंद दरवाजें के पास होता है)। और कई बार हंसी भी आती है खुद पर क्योंकि बंद दरवाजों से मेरा जो लगाव है, ऐसा करने वाली मैं अकेली नहीं हूं बल्कि दुनिया के हर कोने में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें बंद दरवाजों से उतनी ही मोहब्बत है जितनी
ग्रीस (साभार- इंस्टाग्राम)
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जोधपुर (साभार- इंस्टाग्राम)

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