वक्त नहीं मिला...

पता है वक्त कहीं नहीं मिलता
बहुत खोजा पर वक्त
है जो नहीं मिलता
आजकल
मिला था एक बार
जब तुमने पहली बार अचानक से
हाथ थामा था मेरा
और मैंने हाथ छुड़ाने का नाटक किया था
उस दौरान वक्त ने भी
ठहर कर हम दोनों को देखा था
तब मिला था जब तुम
जिंदगी के सफर में अकेले चल दिए थे
उस दौरान अकेलेपन को बांटने के लिए
वक्त था मेरे साथ
कई दफा जब अकेलेपन से चिढ़ जाती हूं ना
तब वक्त होता था मुझे बहलाने के लिए
वक्त ने समझाया था एक बार यूं ही
कि कभी खुद को भी तो तुम
समझा करो, कभी खुद पर भी
मुझे बर्बाद किया करो
हमेशा क्या मुझे लेकर
किसी का इंतेजार करती हो
मैं सिर्फ तुम्हारे लिए आता हूं
ताकि दो पल तुम मेरे साथ रहा करो
तब वक्त होता था मेरे पास
और मैं कहीं और गुम होती थी
कई दिन से वक्त आया नहीं मेरे पास
बहुत ढूंढ रही हूं कि मिल जाए तो
इस बार न करूं वो गलती
तुम्हारे ख्यालों के चलते वक्त को दरकिनार कर दिया
पर आज लगता है वक्त ने मुझे दरकिनार कर दिया
कोई किसी के लिए कहां ठहरता है
वक्त ने भी इंतेजार किया, थोड़ा ठहरा
और फिर चल दिया...
अब मैं उसे ढूंढ रही हूं
तो वक्त नहीं मिल रहा...
शायद वक्त रेत हो गया
जो फिसल गया मेरे हाथों से।


दिव्या 

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