भाषाएं

सबसे ज्यादा डर किसका लगता है तुम्हें
भाषाओं को न जानने का
सुनो और देखो तो सही
कितनी तो भाषाएं आसपास हैं फैली
पर मुझे तो बस एक ही भाषा आती है
कभी-कभी डर लगता है
कोई भाषा न जानने से
किसी रिश्ते को तो नहीं खो दूंगी।
जवाब के बदले में वो मुस्कुराता है बस
तुम मुस्कुराए क्यों
तुम्हें आती  तो हैं कई भाषाएं
तो क्यों कहती हो
कि नहीं  आती मुझे कोई भाषा
मेरे होंठों ने हल्के से क्या कहा
वो जान तो गई हो तुम...
पता है मुझे कई सारी भाषाएं आती हैं
फिर भी मैं डरता हूं
क्यों
क्योंकि मुझे भी तुम्हारी तरह भाषा का डर है
कई बार लगता है कि
तुम यूं ही कभी अपनी आंखों से
एक अलग भाषा में कुछ कहोगी
तो क्या समझ पाऊंगा मैं
तुम्हारी अंगुली के पोरों की वो जो भाषा है
कहीं उसका अहसास भूल गया तो
पैरों के अंगूंठों से गिली मिट्टी पर
जो तुम बस रेखाएं बनाती हो
उनके अक्षर नहीं समझ पाया तो
तुम अकेली कितनी सारी भाषाएं तो बोलती हो
कहीं किसी दिन उनमें से कोई एक भूल गया तो
क्या तुम हमारे रिश्ते की भाषाई व्याकरण के
समीकरण को अकेले हल कर पाओगी न
फिर खुद ही खुद से बोलता हूं
मेरे आधे हिस्से को मुझसे कहीं ज्यादा भाषाएं आती है
फिर तुम्हारे इन कंधों पर
एक गहरी सांस लेते हुए
हल्के से राहत वाली भाषा बोलता हूं
और तुम्हारी अंगुलियां मेरे बालों को
सहलाते हुए
मेरी उस कही गई भाषा पर

अपनी भाषा की सहमति जाताती हैं

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