कुछ लिखा, खोया हुआ सा...
तुम लेखक भी अजीब होते हो...
क्यों ?
अरे, तुम लोगों को कहीं कोई कागज का टुकड़ा दिखा नहीं कि लिख देते हो अपने दिल की बात।
वो हंसते हुए... अच्छा तो ये बात है। वैसे तुमने ये बात तो सही कही है, इसी आदत के चलते देखो पूरे दो घंटे से परेशान हो रही हूं।
क्यों भला?
अरे कोई पीस लिखा था किसी कागज पर अब ढूंढ रही हूं कि रखा कहां है...
तुम्हें कोई कागज मिला है क्या जो तुम वो बात कह रहे थे अभी।
हां मिला है न... तब भी तो कह रहा था कि तुम लोग कागज देखते ही अपनी दिल की बात लिख देते हो।
अच्छा ये बाताओ लिखा क्या है? अरे चुप क्यों बताओ न क्या पता मेरा खोया हुआ वही पीस हो, जिसे ढूंढ रही हूं इतनी देर से।
हां सही कहा खोया हुआ है....
बोलो भी क्या लिखा है उसपर मैंने
वो......शांतनु के बारे में लिखा है....
वो चुप हो जाती है, थोड़ी देर बाद बोलती है, कुछ खोए हुए लोग आपको कागज में ही मिलते हैं।
वो तब भी खामोश रहता है।
पता है मैं अपना लिखा सहेज कर क्यों नहीं रखती, इधर-उधर क्यों किसी कागज पर लिख देती हूं, इसलिए क्योंकि तुम उन सारे लिखे हुए को संभाल लेते हो जिस तरह मुझे संभाले हुए हो न जाने कितने सालों से।
क्यों ?
अरे, तुम लोगों को कहीं कोई कागज का टुकड़ा दिखा नहीं कि लिख देते हो अपने दिल की बात।
वो हंसते हुए... अच्छा तो ये बात है। वैसे तुमने ये बात तो सही कही है, इसी आदत के चलते देखो पूरे दो घंटे से परेशान हो रही हूं।
क्यों भला?
अरे कोई पीस लिखा था किसी कागज पर अब ढूंढ रही हूं कि रखा कहां है...
तुम्हें कोई कागज मिला है क्या जो तुम वो बात कह रहे थे अभी।
हां मिला है न... तब भी तो कह रहा था कि तुम लोग कागज देखते ही अपनी दिल की बात लिख देते हो।
अच्छा ये बाताओ लिखा क्या है? अरे चुप क्यों बताओ न क्या पता मेरा खोया हुआ वही पीस हो, जिसे ढूंढ रही हूं इतनी देर से।
हां सही कहा खोया हुआ है....
बोलो भी क्या लिखा है उसपर मैंने
वो......शांतनु के बारे में लिखा है....
वो चुप हो जाती है, थोड़ी देर बाद बोलती है, कुछ खोए हुए लोग आपको कागज में ही मिलते हैं।
वो तब भी खामोश रहता है।
पता है मैं अपना लिखा सहेज कर क्यों नहीं रखती, इधर-उधर क्यों किसी कागज पर लिख देती हूं, इसलिए क्योंकि तुम उन सारे लिखे हुए को संभाल लेते हो जिस तरह मुझे संभाले हुए हो न जाने कितने सालों से।
#कुछ लिखा, खोया हुआ सा
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