एक कहानी ख्वाहिश की...
निवेदिता कहां है आजकल?
वो, दमन और दीऊ में अपनी यात्रा के मजे ले रही है। कितनी बेहतरीन जिंदगी जी रही है वो... पैरों में स्पोर्ट्स शूज, पीठ पर एक बैग, गले में एक शानदार कैमरा और पॉकेट और डेबिट कार्ड में पैसे। जिंदगी में और क्या चाहिए। कई बार अपनी बेटी की ये जिंदगी देखकर सोचती हूं जिंदगी में ज्यादा चीजों की दरकार दरअसल इतनी होती नहीं है जितनी हम शो करते हैं।
बात तो तुमने सही कही है, निवेदिता का सपना रहा होगा न ये...
सच कहूं तो ये सपना मेरा था, जब वो गर्भ में थी न मेरे तो रोज अपने इसी सपने को अकेले में बैठ उससे साझा करती थी। मुझे वाकई नहीं पता था कि बड़े होने पर मेरा वही सपना वो जीएगी। पता है जब पहली बार वो निकली थी न यूं घूमने तो पता है उसने मुझसे कहा था कि मां आपका सपना जीने जा रही हूं वो भी अपनी आंखों से...पता है मां अक्सर मां-बाप अपने सपने बच्चे पर थोपते हैं कि फलां बनों, पैसे कमाओ, रूतबा बनाओ, पर आपने तो सपने में मुझे जिंदगी दे दी वो जिंदगी जो सिर्फ मेरी है, इसलिए आपके सपने को मैंने अपनी जिंदगी मान ली। अब जब कहीं भी जाती है तो फोनकर पता है क्या कहती है कि मां जिस भी जगह जाती हूं तो उस जगह को दो बार देखती हूं एक बार अपनी आंखों से और दूसरी बार आपकी आंखों से पता है ऐसा करने से मुझे वो जगह और भी ज्यादा खूबसूरत लगती है।
विराज ने कैसे इजाज़त दे दी निवेदिता को यूं घूमने की?
एक रूखी हंसी हंसते हुए... विराज ने रोज एक औरत को अपने पास घुट घुट के जीते हुए देखा है... और वो अपनी बेटी के लिए ऐसी जिंदगी नहीं चाहते।
डर नहीं लगता है मतलब, निवेदिता है तो लड़की ही न
नहीं लगता है डर, क्योंकि मुझे उसपर ट्रस्ट है, मैं हर हालत में उसका साथ दूंगी ये वादा मैं उससे कर चुकी हूं और रही बात किसी अनहोनी की तो बुरा मत मानना.... लड़कियां अपने खुद के घरों में भी सेफ नहीं होती है... इसलिए इन बातों पर ध्यान नहीं देती बस उसकी खुशी पर ध्यान देती हूं।
अच्छा ये बताओ तुम्हारा बेटा नकुल क्या कर रहा है
कुछ नहीं एक मल्टीनेशल कंपनी में ऊंचे ओहदे पर है, पर यार हमेशा फ्रस्टेट रहता है कि ये क्या जिंदगी है मैं नौकरी छोड़ दूंगा...फलां-फलां
निशा हंसते हुए—एक बात कहूं, मेरी बेटी, बेटी होकर भी आज़ाद है और तुम्हारा बेटा, बेटा होकर भी कैद है।
वो, दमन और दीऊ में अपनी यात्रा के मजे ले रही है। कितनी बेहतरीन जिंदगी जी रही है वो... पैरों में स्पोर्ट्स शूज, पीठ पर एक बैग, गले में एक शानदार कैमरा और पॉकेट और डेबिट कार्ड में पैसे। जिंदगी में और क्या चाहिए। कई बार अपनी बेटी की ये जिंदगी देखकर सोचती हूं जिंदगी में ज्यादा चीजों की दरकार दरअसल इतनी होती नहीं है जितनी हम शो करते हैं।
बात तो तुमने सही कही है, निवेदिता का सपना रहा होगा न ये...
सच कहूं तो ये सपना मेरा था, जब वो गर्भ में थी न मेरे तो रोज अपने इसी सपने को अकेले में बैठ उससे साझा करती थी। मुझे वाकई नहीं पता था कि बड़े होने पर मेरा वही सपना वो जीएगी। पता है जब पहली बार वो निकली थी न यूं घूमने तो पता है उसने मुझसे कहा था कि मां आपका सपना जीने जा रही हूं वो भी अपनी आंखों से...पता है मां अक्सर मां-बाप अपने सपने बच्चे पर थोपते हैं कि फलां बनों, पैसे कमाओ, रूतबा बनाओ, पर आपने तो सपने में मुझे जिंदगी दे दी वो जिंदगी जो सिर्फ मेरी है, इसलिए आपके सपने को मैंने अपनी जिंदगी मान ली। अब जब कहीं भी जाती है तो फोनकर पता है क्या कहती है कि मां जिस भी जगह जाती हूं तो उस जगह को दो बार देखती हूं एक बार अपनी आंखों से और दूसरी बार आपकी आंखों से पता है ऐसा करने से मुझे वो जगह और भी ज्यादा खूबसूरत लगती है।
विराज ने कैसे इजाज़त दे दी निवेदिता को यूं घूमने की?
एक रूखी हंसी हंसते हुए... विराज ने रोज एक औरत को अपने पास घुट घुट के जीते हुए देखा है... और वो अपनी बेटी के लिए ऐसी जिंदगी नहीं चाहते।
डर नहीं लगता है मतलब, निवेदिता है तो लड़की ही न
नहीं लगता है डर, क्योंकि मुझे उसपर ट्रस्ट है, मैं हर हालत में उसका साथ दूंगी ये वादा मैं उससे कर चुकी हूं और रही बात किसी अनहोनी की तो बुरा मत मानना.... लड़कियां अपने खुद के घरों में भी सेफ नहीं होती है... इसलिए इन बातों पर ध्यान नहीं देती बस उसकी खुशी पर ध्यान देती हूं।
अच्छा ये बताओ तुम्हारा बेटा नकुल क्या कर रहा है
कुछ नहीं एक मल्टीनेशल कंपनी में ऊंचे ओहदे पर है, पर यार हमेशा फ्रस्टेट रहता है कि ये क्या जिंदगी है मैं नौकरी छोड़ दूंगा...फलां-फलां
निशा हंसते हुए—एक बात कहूं, मेरी बेटी, बेटी होकर भी आज़ाद है और तुम्हारा बेटा, बेटा होकर भी कैद है।
#एक कहानी ख्वाहिश की...
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