26 साल की उम्र में उसने पहली बार चिनाब को देखा था, चिनाब का बहाव उसे आकर्षित कर रहा था। ड्राइवर ने उसे चिनाब को यूं देखते हुए देखा तो कहा मैडम पहाड़ी नदियां ऐसी ही होती हैं, तेज़ बहाव वाली और खतरनाक। ड्राइवर ने इशारा करते हुए कहा, आप वो साइन बोर्ड देख रही हैं, उसने चिनाब से नज़र हटा उस ओर देखा जिधर ड्राइवर इशारा कर रहा था। साइन बोर्ड पर लिखा था, आगे चिनाब नदी है, कृपया गाड़ी धीमी गति से चलाएं। ड्राइवर उसे पहाड़ी नदियों की उच्श्रृंखलता की बात बता रहा था, पर वो चिनाब के उस तेज़ बहाव में खोई थी। उसे चिनाब से एक अपना पन सा लगा। उसके अंदर भी तो ऐसा एक तेज़ बहाव अनवरत चलता रहता है, पर वो किसी से नहीं कहती है, चिनाब के बहाव जितना ही, उतना ही खतरनाक, उतना ही सब कुछ तबाह कर देने की शक्ति वाला बहाव। पर ये बहाव किसी को नहीं दिखता। कभी किसी ने उसे पहाड़ी नदी जैसा कहा था, पर तब उसने उस बात पर ध्यान नहीं दिया था, पर आज चिनाब और अपने अंदर की समानता को वो महसूस कर रही थी। कहते हैं पानी, नदी और समंदर का सपना देखना बुरा होता है। पर कुछ सालों बाद उसने चिनाब को सपने में देखा। पर सपने में चिनाब शांत थी, एकदम...
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